122 122 122 122
बस इतना बहुत हौसला कर लिखा है
हर इक जा पे उनको सितमगर लिखा है/1/
शिकायत अब इस बात पर भी है उनको
कि हमने तआर्रूफ कमतर लिखा है/2/
कहीं भूख लाचारियाँ बस लिखीं है
जरूरत से ज्यादा कहीं पर लिखा है/3/
तकाजो की भट्टी सुलगते है अरमां
भला किसने ऐसा मुकद्दर लिखा है/4/
फकत चार दीवारे और बामो दर है
न खुशियां न आंसू मयस्सर लिखा है/5/
नदारद सभी रब्त जज्बात सारे
जरूरत ने ही बस उसे घर लिखा है/6/
जिधर देखिए बस दरिंदे दिखे हैं
घरों घर यहां आदमी भर लिखा है/7/
चला था जहाँ जीतने सरफिरा इक
किताबों में उसको सिकंदर लिखा है/8/
न मरती यहां पर है उम्मीद कोई
तभी इस जगत को चराचर लिखा है/9/
जरा सख्त करने लगे फैसले वो
तो अखबार ने उनको हिटलर लिखा है/10/
खुशी हो कि गम भर ही आती है आंखे
तभी शायरों ने समंदर लिखा है/11/
कोई भी न इतना मुकम्मल हुआ है
लिखा जिसने जो भी नया पर लिखा है/12/
जरा सा भरम भी तो रहने दो दिल में
कुछ अच्छा सा हमने यहाँ पर लिखा है/13/
No comments:
Post a Comment