Tuesday, 15 September 2020

बस इतना बहुत हौसला कर लिखा है

122 122 122 122 
बस इतना बहुत   हौसला  कर   लिखा है
हर इक जा पे उनको  सितमगर लिखा है/1/

शिकायत अब इस बात पर भी है उनको 
कि हमने  तआर्रूफ  कमतर    लिखा है/2/

कहीं   भूख   लाचारियाँ   बस   लिखीं है
जरूरत  से  ज्यादा   कहीं  पर  लिखा है/3/

तकाजो   की  भट्टी    सुलगते  है  अरमां 
भला   किसने   ऐसा   मुकद्दर   लिखा है/4/

फकत  चार  दीवारे   और   बामो  दर है
न  खुशियां  न  आंसू  मयस्सर  लिखा है/5/

नदारद    सभी    रब्त     जज्बात   सारे
जरूरत   ने  ही  बस  उसे  घर  लिखा है/6/

जिधर   देखिए    बस    दरिंदे    दिखे हैं
घरों  घर   यहां   आदमी  भर   लिखा है/7/

चला  था  जहाँ   जीतने   सरफिरा  इक
किताबों  में  उसको   सिकंदर  लिखा है/8/

न  मरती   यहां  पर   है   उम्मीद   कोई
तभी  इस  जगत  को  चराचर  लिखा है/9/

जरा   सख्त   करने    लगे   फैसले  वो
तो अखबार ने  उनको हिटलर लिखा है/10/

खुशी हो कि गम  भर ही आती है आंखे
तभी    शायरों   ने    समंदर    लिखा है/11/

कोई  भी  न  इतना   मुकम्मल  हुआ है
लिखा जिसने जो भी नया पर लिखा है/12/

जरा सा  भरम  भी तो  रहने दो दिल में
कुछ अच्छा सा हमने  यहाँ पर लिखा है/13/

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