Tuesday, 15 September 2020

तमन्ना आरजू उम्मीद थे रुतबा थे बाबूजी

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तमन्ना    आरजू    उम्मीद    थे    रुतबा   थे   बाबूजी
मेरी  हिम्मत   मेरी  ताकत   मेरा  जज्बा  थे   बाबूजी/1/

मेरे  साहस  थे   मेरे   हौसला  थे   डर   गुजारिश   थे
मेरे   रहबर   मेरे   प्रेरक   मेरी   दुनिया   थे   बाबूजी/2/

सफलता  की   कहानी  के   रहे   आधार   वो  हरदम
मेरी   नाकामियों  पर   इक  बड़ा   परदा  थे  बाबूजी/3/

बड़े  बरगद  के  मानिंद  सायबानी  का  रहा अहसास
निगहबानी  का   जीता-जागता   किस्सा  थे  बाबूजी/4/

वो  इक  बुनियाद  थे   मजबूत   थामे  थे  समूचा  घर
जरूरत के  मुताबिक  सबका  ही  हिस्सा  थे  बाबूजी/5/

विरासत में  मिली है  हमको तो  तहजीब की  तालीम
सलीका  के   अदब  के   पाठशाला  सा  थे   बाबूजी/6/

भले  ही  आज   जूते  मैं   पहन  लेता  हूँ   उनके  पर
मेरे  कद  से   तजरबे  में   बहुत   ज्यादा  थे   बाबूजी/7/

कभी  कोई    कमी   महसूस    न   होने   वो   देते  थे
हर इक ख्वाहिश मुकम्मल होने के जरिया थे बाबूजी/8/

फटी   बनियान   की    हर  छेद   देती   है   गवाही ये
कि  अपने  वास्ते  किस  हद से  लापरवा  थे  बाबूजी/9/

कमाई    ओढ़    रख्खी  है    मेरे   दिन रात   खर्चों ने
मगर  इक  संतुलित जीवन का अफसाना थे बाबूजी/10/

कभी घर तो  कभी बच्चों के  खातिर रोज ही खुद का
किया    सौदा    सरे बाजार   जब   जिंदा  थे बाबूजी/11/

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