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तमन्ना आरजू उम्मीद थे रुतबा थे बाबूजी
मेरी हिम्मत मेरी ताकत मेरा जज्बा थे बाबूजी/1/
मेरे साहस थे मेरे हौसला थे डर गुजारिश थे
मेरे रहबर मेरे प्रेरक मेरी दुनिया थे बाबूजी/2/
सफलता की कहानी के रहे आधार वो हरदम
मेरी नाकामियों पर इक बड़ा परदा थे बाबूजी/3/
बड़े बरगद के मानिंद सायबानी का रहा अहसास
निगहबानी का जीता-जागता किस्सा थे बाबूजी/4/
वो इक बुनियाद थे मजबूत थामे थे समूचा घर
जरूरत के मुताबिक सबका ही हिस्सा थे बाबूजी/5/
विरासत में मिली है हमको तो तहजीब की तालीम
सलीका के अदब के पाठशाला सा थे बाबूजी/6/
भले ही आज जूते मैं पहन लेता हूँ उनके पर
मेरे कद से तजरबे में बहुत ज्यादा थे बाबूजी/7/
कभी कोई कमी महसूस न होने वो देते थे
हर इक ख्वाहिश मुकम्मल होने के जरिया थे बाबूजी/8/
फटी बनियान की हर छेद देती है गवाही ये
कि अपने वास्ते किस हद से लापरवा थे बाबूजी/9/
कमाई ओढ़ रख्खी है मेरे दिन रात खर्चों ने
मगर इक संतुलित जीवन का अफसाना थे बाबूजी/10/
कभी घर तो कभी बच्चों के खातिर रोज ही खुद का
किया सौदा सरे बाजार जब जिंदा थे बाबूजी/11/
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