1212 1122 1212 22
सुकून चैन का कब से है इंतजार मुझे
भटक रहा हूँ कहीं तो मिले करार मुझे/1/
कदम कदम पे ही मिलती रही है हार मुझे
हर एक मौज खुशी है मिली उधार मुझे/2/
तमाम उम्र ही जद्दोजहद में गुजरी है
खुलूसे दिल से मुकद्दर कभी पुकार मुझे/3/
कभी तो मुझको भी मौका दे मुस्कुराने का
सता रहे हैं यूँ दिन रात गम हजार मुझे/4/
तरीके तौर रवायत निभाने के खातिर
तलाश करते हैं शिद्दत से रोज यार मुझे/5/
जले है हाथ मेरे तो चरागां करने में
हो अपने आप में भी कैसे एतबार मुझे/6/
रजा बगैर भी आते हैं वो खयालो में
नही है दिल पे अब इतना भी इख्तियार मुझे/7/
पकड़ के उंगली मेरी चल रहे थे जो कल तक
समझ रहे हैं वो बच्चे ही अब गवांर मुझे/8/
कदम कदम पे नजर आयी भूख बेकारी
दिखाई दी न कहीं पर कभी बहार मुझे/9/
मेरी कलम से निकलते हैं रंजो गम ही सदा
समझते जहन जदा लोग है बिमार मुझे/10/
लिखूं क्या उसके लिए जिसकी मैं लिखावट हूँ
हुआ है खुश वो पिता हर समय संवार मुझे/11/
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