Tuesday, 15 September 2020

ऐ मुकद्दर मेरे मैं तेरा कुसूरवार भी हूँ

2122 1122 1122 22 
ऐ  मुकद्दर    मेरे   मै   तेरा   कुसूर वार   भी हूँ 
जो  दिया  उससे  जियादा का तलबगार भी हूँ 

मेरी  औकात  से  बढ़ कर   रहीं ख्वाहिश मेरी
बेलगामों  सी   जरूरत  का   करजदार  भी हूँ

होशियारी   से   तो    ता उम्र   रहा  नावाकिफ 
और  खुद  पे  है  गुमां  कि मै  समझदार भी हूँ

घर  में   उम्मीदें   तका   करती  है   रस्ता  मेरा
मुंतजिर   बेबसों   का   यूँ   मैं  गुनहगार भी हूँ

चाहे   बे फिक्र    बे परवाह    नकारा   कह लो
पर बहुतों का मै  हिम्मत भी हूँ जिम्मेदार भी हूँ 

मेरे  खातिर  भी  मुकर्रर है  जमीं  दो गज कहीं 
अपनी उस मिल्कियत का ही मै जमीदार भी हूँ

कोई  शिकवा   न  गिला  जिंदगी  में  है  बाकी 
अपनी  ही  हरकतो  से कुछ तो मैं बेजार भी हूँ

कश्मकश  जद्दोजहद  उम्र  तलक   चलते  रहे
बस   जरा और    जरा और   हवसकार  भी हूँ

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