1222 1222 122
हुए मजबूर क्या क्या देखने को
कभी तू भी चला आ देखने को/1/
तमाशा इक नया हर रोज ही है
तरसती आंखे अच्छा देखने को/2/
जमीं तरसी है बारिश के लिए ज्यूँ
यूँ तरसे हम उजाला देखने को/3/
हैं चिपकी खिड़कियों पर ही निगाहें
भला सा कुछ नजारा देखने को/4/
जिधर भी देखिये महशर है बरपा
यही क्या रह गया था देखने को/5/
बड़ा होना बहुत मुश्किल है प्यारे
पड़े है घर समूचा देखने को/6/
तमन्ना आरजू उम्मीद धोखा
है क्या इसके अलावा देखने को/7/
वही दो चार जुमले हैं पुराने
मिला कुछ भी नया क्या देखने को/8/
बड़ी जद्दोजहद के बाद जाकर
मिला है आज मौका देखने को/9/
जो पेश आती है तस्वीरें जहाँ की
नही चाहा था ऐसा देखने को/10/
बदलते दौर बदली है सियासत
मिले क्या क्या नजरिया देखने को/11/
हमल में ठीक था नवजात बनकर
बशर आया क्यूँ दुनिया देखने को/12/
नही मिलता यहां पर आदमी बस
दरो दर है फरिश्ता देखने को/13/
रवायत है चलन दस्तूर है ये
नफस बेबस खुदाया देखने को/14/
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