1212 1122 1212 22
तेरी पनाह में मेरे ये जिस्मों जान रहे
न हो जमीन या चाहे न आसमान रहे
न इल्तिजा न गुजारिश है कोई और मेरी
बस एक तू ही खयालों में शब बिहान रहे
जुदा न होना कभी चाहे जो सजा देना
सफर के वक्त तू है बस ये इत्मीनान रहे
तू मेरे पास रहे इसलिए जरूरी है
तमाम उम्र ही चलता ये इम्तिहान रहे
कुछ और बात भले हो न हो किसी से कोई
मेरी जुबां पे तेरा हर घड़ी बखान रहे
हर एक कतरा तेरा नाम ही पुकारे बस
अगरचे जिस्म सरापा लहूलुहान रहे
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