2122 2122 2122
सर छिपाने को ठिकाना ढूंढता है
अब परिंदा आशियाना ढूंढता है/1/
थक गया दर दर भटक कर उम्र भर वो
अब सुकूं का शामियाना ढूंढता है/2/
धूप में झुलसाता है वो जिस्म अपना
ठोकरों में आबो दाना ढूंढता है/3/
शाम को घर लौटता वो है पशेमां
फिर सुनाने को बहाना ढूंढता है/4/
मुतमईन किरदार मेरा है न मुझसे
वो नया हर दिन फसाना ढूंढता है/5/
कौन अब समझाए दिल को दे तसल्ली
दोस्त ये अब तक पुराना ढूंढता है/6/
जो गया वो लौट कर आता नही है
जान कर भी क्या जमाना ढूंढता है/7/
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