Tuesday, 15 September 2020

बात होती है अब कहां कोई

2122 1212 22 
बात  होती  है  अब कहां कोई
कुछ भी करता नही बयां कोई

सब  लिये फिरते आग सीने मे
इश्क  पाले था कल जहां कोई

हर  कदम  झूठे और फरेबी हैं 
ढुंढे  सच  के  कहां मकाँ कोई 

ख्वाब  पलते हैं रोज आंखो मे
पर  न ताबीर की है दुकां कोई 

बे वजह   है  तलाश  दैर हरम 
रब  मिले  ना मिले निशां कोई 

जाने क्या बेबसी थी उनकी भी
यूँ  न   होता  है   पशेमां   कोई

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