2122 1212 22
बात होती है अब कहां कोई
कुछ भी करता नही बयां कोई
सब लिये फिरते आग सीने मे
इश्क पाले था कल जहां कोई
हर कदम झूठे और फरेबी हैं
ढुंढे सच के कहां मकाँ कोई
ख्वाब पलते हैं रोज आंखो मे
पर न ताबीर की है दुकां कोई
बे वजह है तलाश दैर हरम
रब मिले ना मिले निशां कोई
जाने क्या बेबसी थी उनकी भी
यूँ न होता है पशेमां कोई
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